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Akbar Birbal ki kahaniya- part 1

          Akbar Birbal ki kahaniya

             अकबर बीरबल की कहानियां

               1. प्रकृति पर किसका राज?

Akbar Birbal ki kahaniya

               

अकबर के राजदरबार में बीरबल सबसे चतुर थे । उनसे सारे दरबारी ईर्ष्या करते थे । इसलिए सभी दरबारी हमेशा उनके लिए नई नई समस्याओं को रखते थे । लेकिन बीरबल क्षण भर में ही उत्तर दे देते थे ।

ऐसे ही एक बार किसी दरबारी ने बादशाह अकबर के सामने सवाल किया कि शहंशाह हमारे राज्य में कुल कितने कोए होंगे? 

बादशाह अकबर यह बात भी जानते थे कि यह प्रश्न उनके लिए नहीं बल्कि बीरबल की परीक्षा के लिए पूछा गया है ।

बादशाह अकबर ने तुरंत यह प्रश्न दरबार के सामने रखा और उत्तर मांगा।

सभी ने बीरबल के चेहरे की ओर देखा ।
बीरबल तुरंत बोल पड़े -" जहांपनाह ! हमारे पूरे राज्य में कुल 95,474 कोए है ।"
"क्या तुम अपने उत्तर के बारे में निश्चित हो ? " अकबर ने पूछा।

बीरबल बोले -" जी जहांपनाह ! "

अकबर ने फिर पूछा -" अगर कम हुए तो ? "
बीरबल ने पुनः उत्तर दिया -" इसका अर्थ होगा कि कोए बाकी राज्यो में अपने रिश्तेदारों से मिलने गए होंगे। "

अकबर ने पूछा -" और अगर ज्यादा हुए तो ?"
बीरबल  ने उत्तर दिया -" इसका अर्थ होगा कि अन्य राज्यों से कोए अपने रिश्तेदारों से मिलने हमारे राज्य आए होंगे।"

अकबर को स्मरण हुआ कि यह प्रश्न अर्थ - विहीन है, क्योंकि मानव का राज मानवों पर ही हो सकता है ! प्रकृति पर नहीं ! प्रकृति स्वतंत्र है उस पर राज करना असंभव है।

अकबर ने सारे मंत्रियों की ओर देखा और जोर जोर से हंसने लगे।

Akbar Birbal ki kahaniya
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                             2. दोषी कौन?



एक बार राजा बीरबल अपने बगीचे में टहल रहे थे उस समय वहां पर कोई नहीं था।

   बीरबल के महल के दरवाजे पर खटखटाने की आवाज़ आई , उनका दरबारी दरवाजे पर बनी खिड़की से झांका और देखा कि वहां पर दो आदमी खड़े थे उनको देखकर वह बोला 
दरबारीकौन हैं आप लोग ?

Akbar Birbal ki kahaniya

 आदमी बोला - हमें राजा बीरबल से मिलना है ।

दरबारी बोला  "अभी बीरबल जी टहल रहे है और एकांत चाहते है । आप लोग कल दरबार में आना । वहां पर राजा जी आपकी समस्या को हल कर देंगे।"

लेकिन वह नहीं माने और बोले कि हमें अभी उनसे मिलना है ।

तब उनकी बहस हो गई ।

दरबारी ने बीरबल को कहा -" महाराज! दो आदमी आपसे अभी मिलना चाहते हैं । "

बीरबल ने उनको अंदर बुलाने को कहा।

वह  दोनो आदमी बीरबल के पास आ गए ।
बीरबल ने उनसे पूछा -" आपको क्या समस्या है?"

एक आदमी बोला महाराज मैं एक तेल बेचने वाला हूं और ये एक बूचड़ है।

तब तक वहां पर शहंशाह अकबर भी पहुंच गए।
बीरबल ने उनको आदर के साथ अंदर बैठाया और अकबर ने मामले को सुनने में रुचि जताई।

अकबर बोला तेल वाले तुम बताओ क्या बात है?
तेल वाला बोला - "शहंशाह ! मै रोज की तरह बाज़ार से तेल को बेचकर घर जा रहा था । रास्ते में इस बूचड़ की दुकान है । इसने मुझसे कहा कि इधर आओ और मुझे एक बोतल तेल दो ।

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मैंने इसको तेल दिया और इससे 2 सिक्के मांगे ।
इसने मुझे 1 चांदी का सिक्का दिया । मैंने इसे छुट्टे लौटने के लिए अपने सिक्को के थैले को निकाला और इसे छुट्टे लौटा दिए ।

तब इसने मुझसे कहा कि तुम इतनी धूप में चलकर  थक गए होगे थोड़ा हाथ मुंह धो लो।मैंने अपना सारा सामान वहीं पर रख दिया और
मै जब हाथ मुंह धुलकर आया तो ये मेरे सिक्को के थैले से चोरी कर रहा था ।

जब मैंने इससे पूछा कि ये तुम क्या कर रहे हो तो इसने उस थैले को अपना बताया और मुझसे झगड़ा करने लग गया । इसलिए मै इसको आपके पास लाया हूं ताकि मुझे मेरे सिक्के वापस मिल पाए।"

बीरबल ने बूचड़ से कहा अब तुम अपना पक्ष रखो ।

बूचड़ बोला - " महाराज ! यह तेल वाला बिल्कुल झूट बोल रहा है,इसका विश्वास मत कीजिए ,यह आपको बेवकूफ बना रहा है।

दरअसल बात यह है कि जब दोपहर को मैं अपनी दुकान पर मांस पीस रहा था , तो उस समय यह तेल वाला मेरी दुकान पर आया और मुझसे बोला कि आज मेरी कोई बिक्री नहीं हुई है , थोड़ा तेल खरीद लो । 

मैंने इससे कहा कि मैंने पहले ही 1 महीने का तेल राशन सब रखा है मुझे जरूरत नहीं है ।

इसने कहा कि थोड़ा सा खरीद लो , इस पर दया करके मैंने इसे 1 बोतल तेल देने को कहा और इसे दो सिक्के दिए ।


इसने मुझसे सिक्के लिए और कहा कि धूप बहुत है मुझे थोड़ा पानी पिला दो । 

मै पानी लेने अंदर गया तो इसने उस समय मेरी दुकान से सिक्को की थैली उठा ली लेकिन इसको मैंने ऐसा करते हुए देख लिया और ये पकड़ा गया ।इसलिए मै अपने धन के लिए इसको पकड़कर आपके पास लाया हूं।

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शहंशाह अकबर बोले - ' बीरबल इस समस्या को तुम कैसे हल करोगे।'

बीरबल बोले - " आसान है महाराज ! "

बीरबल ने अपने नौकर को एक बर्तन में पानी लाने को कहा ।

जब वह नौकर पानी लेकर आ गया तो उन्होंने वह सिक्कों की थैली से सिक्के निकाले और सिक्को को पानी में डाल दिया ।

थोड़े समय के बाद बीरबल ने निर्णय दे दिया कि तेल वाला सच कह रहा है।

 अकबर ने बीरबल से पूछा कि तुम ये बात कैसे के सकते हो ।

बीरबल ने उत्तर दिया - ' महाराज अगर आप इन पानी में डूबे हुए सिक्को की तरफ गौर से देखेंगे तो आपको पानी के ऊपर तेल तैरता हुआ दिखेगा और ये एक या दो सिक्को से नहीं बल्कि सारे सिक्को पर लगा हुआ था , इससे इस बात का स्पष्टीकरण हो जाता है कि तेल वाले के हाथो से ही सिक्को पर इतना तेल लग सकता है ।
बूचड़ के हाथो से नहीं ! "

बूचड़ पकड़ा गया ।

वह बोला - " महाराज मुझे माफ़ कर दीजिए , मैं तेल वाले के सिक्को को देखकर लालच में पड़ गया था , लेकिन अब मै माफी चाहता हूं।"

अकबर बोले - " तुमने अपराध किया है, तुम्हे माफी नहीं मिलेगी । तुमको तेल वाले को सिक्को के साथ - साथ 10 चांदी के सिक्के जुर्माने के रूप में देने होंगे , और सजा के रूप में तुमको  एक महीने के लिए कारावास ( जेल) में बंद कर दिया जाएगा ।

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