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Hindi Funny Story नकली जादूगर

                       Funny Story In Hindi


नकली जादूगर - हिंदी कहानी

एक बार एक राजा था ।राजा को नए कपड़े और पोशाकों का शौक था, इसलिए वह दिन में कई बार वह एकदम नई शाही पोशाक को पहनता था।

जहां कई राजा अपने दिन जनता की भलाई करने में लगा देते थे वहीं यह राजा सदैव अपने पहनावे के लिए नई पोशाकों को मंगवाने में व्यस्त रहता था।

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एक दिन दो लोग राजा की राजधानी में आए। उन्होंने नगरवासियों से कहा कि वे बुनकर यानी कपड़े बुनने वाले है। उन्होंने कहा कि उनके बनाए हुए कपड़े जादुई है उनको सिर्फ कुछ ही व्यक्ति देख सकेंगे सभी लोगों को यह पोशाक नहीं दिखेगी।

वास्तविकता यह थी की वे दोनों बुनकर नहीं बल्कि चोर - बदमाश थे । जब उनको यह सूचना मिली की राजा को कपड़ों का शौक है तो उन दोनों ने बुनकर बनकर राजा को ठगने का प्रयास करना चाहा।

इन नकली बुनकरों ने  कि उनका कपड़ा किसी भी अन्य कपड़े की तुलना में अधिक सुंदर था, लेकिन केवल वे लोग जो बुद्धिमान थे और सबसे उत्कृष्ट थे, वास्तव में जादू के कपड़े देख सकते थे। जो लोग बुद्धिमान नहीं थे और उत्कृष्ट नहीं थे।अच्छी तरह से, वे कुछ भी नहीं देखेंगे।

जब राजा को उनके बारे में पता चला तो उसने सोचा, “मैं सबसे चतुर और सबसे उत्कृष्ट राजा हूँ कोई भी बता सकता है कि  सम्राट बहुत बुद्धिमान है । मुझे उस मूर्खतापूर्ण जादू के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।"

तो राजा उन बुनकरों को देखने गया। दोनों बुनकर चतुर और बदमाश अपनी दुकान के बारे में लोगों को बताते थे और  खाली कोनों और दीवार की ओर इशारा करते थे।

उन्होंने गर्व के साथ कहा, “ठीक कपड़े के इन ढेरों को देखो! निश्चित रूप से आपने इन रंगों के जैसे चमकीले कपड़े कहीं नहीं देखे होंगे। राजा समझ नहीं सका - उसने कोई कपड़ा, कहीं भी नहीं दिखा।

राजा कहीं भी, कोई कपड़ा नहीं देख पा रहा था ।
किन्तु वह राजा था और उसने यह भी सुना था कि उन कपड़ों को केवल बुद्धिमान ही देख सकता है  इसलिए वह नाटक करने लगता है कि मुझे कपड़े दिख रहे हैं।
राजा दोनों जादूगरों(बुनकरों) के पास अपनी भव्य वार्षिक परेड के लिए कपड़े बनवाने के लिए वहां आया था।
राजा को कपड़े नहीं दिखे वह यह सोचने लगा कि शायद वह मूर्ख है किन्तु उसकी प्रजा और मंत्री मूर्ख नहीं हैं  उनको पक्का वह दिखेगा ।

इसलिए राजा ने उन दोनों को कपड़े बनाने के लिए  बोल दिया । उन दोनों ने राजा से एक हजार सोने के सिक्कों की मांग की और कहा कि महाराज ! क्योंकि परेड होने में 1 दिन ही बचा है तो हमें अधिक धन की जरूरत है ।
राजा मान गया  और उनको  एक हजार सोने के सिक्कों के साथ अतिरिक्त धन भी दे दिया ।

अब राजा खुश था कि उसे जादुई कपड़े मिलेंगे जिनको पहनकर जब वह नगर में घूमेगा तो पूरी प्रजा उसके कपड़ों की चमक से आश्चर्यचकित हो जाएगी और उसकी प्रशंसा की जाएगी।

दोनों बदमाश बहुत खुश थे क्योंकि वह अपनी योजना में सफल हो रहे थे। अब उन्होंने बाज़ार से कुछ मोमबत्तियां खरीद ली  और रात भर अपने कमरे में उजाला रखा।
अब लोगों को यह लगा कि वे दोनों राजा की पोशाक बनाने के लिए रात भर काम कर रहे हैं और लोग भी अगले दिन की परेड के लिए उत्साहित थे।

राजा का महामंत्री ,जो कि एक बुद्धिमान व्यक्ति था ।वह समझ चुका था कि ये दोनों बदमाश हैं और राजा से धन ऐंठना चाहते हैं। महामंत्री राजा को सबक सिखाना चाहता था कि उसे केवल अपने पोशाक पर राज्य का धन बर्बाद नहीं करना चाहिए बल्कि राज्य के हितों को भी ध्यान रखना चाहिए ।
साथ ही महामंत्री उन दोनों को भी दंड देना चाहता था
ताकि अन्य कोई इस प्रकार की योजना राजा के विरूद्ध ना बना पाए और राज्य की लाज भी बची रहे, इसलिए महामंत्री उस रात चुप रहे।
वहीं राजा बहुत खुश था और उत्साहित भी । राजा के मित्र राज्यों के राजा भी वहां पधारे थे उनको यह जानने की इच्छा थी कि जादुई कपड़े दिखते कैसे हैं?

सुबह हुई और दोनों बदमाश खाली हाथ राजा के सामने आ गए ।उन्होंने राजा को कहा कि आपकी पोशाक तैयार है ।यह आज तक की सबसे सुंदर पोशाक है। इसे देखने वाले की आंखे चमक जाएंगी ।

और इसकी विशेषता यह है कि यह सबसे हल्की पोशाक है ।
उनमें से एक ने अपना हाथ आगे पढ़ाया और सम्राट को देने का नाटक किया राजा को कुछ नहीं दिख रहा था फिर भी उसने उनके हाथ से लेने का नाटक किया।
 राजा अपनी पोशाक के साथ भीतर चला गया और उसने उनमें से एक को भीतर बुलाया और उसे पोशाक पहनाने की कहा ।
उस आदमी ने पोशाक पहनाने का नाटक किया और चला गया ।राजा ने खुद को शीशे में देख तो उसे कोई वस्त्र नहीं दिख रहा था फिर भी वह खुश था कि लोग उसे देख पाएंगे।
सम्राट ने अपना रथ तैयार करवा लिया और परेड के लिए चल दिया ।
जब राजा सामने आया तो सब लोग उसे नग्न देखकर आशचर्यचकित थे। राजा के मित्र राजा भी यह सोचने लगे कि शायद यह सिर्फ मुझे नहीं दिख रहा है और मै ही मूर्ख हूं।

पूरे नगर के लोग यही सोचने लगे कि मै ही मूर्ख हूं परन्तु दूसरे लोगों को यह पोशाक दिख रही है। सभी चुप रहे।राजा भी यह सोचकर खुश था कि सबको उसकी पोशाक अच्छी लग रही है।

तभी सभा में बैठा एक बच्चा चिल्लाया - देखो! उसने एक भी कपड़ा नहीं पहना है ।और जोर जोर से हंसने लगा उसके साथ उसके साथी बच्चे भी हंसने लगे ।किन्तु राजसभा के लोग अपनी हंसी रोक कर रहे। अब सबकी गर्दन झुकी थी।

अब राजा समझ चुका था कि उसके साथ धोखा हुआ है उसने जैसे तैसे परेड पूरी की और महल में दौड़ा और महामंत्री के पास गया।महामंत्री ने उसको बता दिया कि वे दोनों बदमाश हैं ।

राजा ने महामंत्री को उन दिनों को उचित दंड देने का
आदेश दिया ।वे दोनों अभी भी खुद को जादूगर बता रहे थे जबकि वे पूरी तरह फंस चुके थे।फिर महामंत्री ने एक तरकीब निकाली उसने अगले दिन एक अन्य आदमी को जादूगर बना कर बुलाया और उससे एक रस्सी मांगी जिसे सिर्फ जादूगर देख सकें वास्तव में ऐसी कोई रस्सी नहीं थी।

अब मंत्री ने कुएं से रस्सी बांधने का नाटक किया और
एक एक रस्सी का सिरा उन दोनों के हाथ में देने का नाटक किया और उनसे कहा की अब आप दोनों कुएं से नीचे उतर कर अपने जादूगर होने का सबूत दो।दोनों को मजबूरन कुएं में छलांग लगानी पड़ी।दोनों की डूबकर मौत हो गई।इस प्रकार सम्राट को भी सबक मिल गया और दोनों बदमाशों को भी मृत्यु - दंड मिला।
कहानी से सीख
इस कहानी से हमें दो बातें सीखनी चाहिए
1. हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए उस राजा की तरह नहीं बनना चाहिए जो केवल अपने शौक के लिए राज्य का धन बर्बाद कर रहा था
2. कभी भी दूसरों को ठगने का प्रयास नहीं करना चाहिए अन्यथा उसकी सजा बहुत बुरी भी हो सकती है जैसे कि कहानी में दोनों बदमाशों को मौत की सजा मिली ।
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