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सर्वश्रेष्ठ कौन? हिंदी कहानी Hindi moral story for kids

Hindi Moral Story For Kids

सर्वश्रेष्ठ कौन? हिंदी कहानी




सुल्तानपुर के राजा महाराज विक्रमजीत बहुत पराक्रमी और प्रतापी राजा थे। एक महान योद्धा होने के साथ साथ महाराज बहुत नेक दिल इंसान और नयायप्रिय राजा थे।
Hindi Moral Story For Kids
सर्वश्रेष्ठ कौन? हिंदी कहानी

 महाराज को अपने चित्र बनवाने का शौक भी था, इसलिए वे राज्य में आने वाले हर नए चित्रकार से अपना चित्र अवश्य बनवाते थे। महाराज की जनता उनसे प्रसन्न थी और राज्य धन धान्य से परिपूर्ण था।


एक बार राज्य पर पड़ोसी राज्य की सेना ने बिना चेतावनी के आक्रमण कर दिया। आक्रमण की खबर सुनकर सुल्तानपुर के सैनिक बिना तैयारी के ही युद्ध में चले गए, किन्तु एक बहुत बड़ी समस्या यह थी कि राज्य के सेनापति उस समय राज्य में नहीं थे।सेनापति के राज्य में ना होने के कारण राजा को स्वयं सेना का नेतृत्व करना पड़ा ।

युद्ध शुरू हुआ राजा के नेतृत्व में सैनिकों ने बहुत अच्छे से युद्ध लड़ा। 4 दिन तक युद्ध चला और अंत में राज्य युद्ध जीत भी गया , किन्तु युद्ध में राजा की दाहिनी आंख पर चोट लगने के कारण राजा की आंख फूट गई और राजा काना हो गया।

Short Moral Story In Hindi

एक दिन राज्य में तीन नए चित्रकार आए। राजा को यह सूचना मिली कि राज्य में कोई नया चित्रकार आया है। राजा ने मंत्री को आदेश भेजा कि उसे तुरंत बुलाया जाए ।मंत्री जब वहां पहुंचा तो उसे ज्ञात हुआ कि चित्रकार तीन हैं और महाराज ने सिर्फ एक को ही बुलाया है।

अतः मंत्री इस निर्णय पर पहुंचा कि जो सबसे अधिक प्रतिभावान चित्रकार होगा उसे ही वह राजा के पास ले जाएगा। मंत्री ने पूछा आप तीनों ने से जो सबसे अधिक अच्छा चित्रकार है उसे महाराज ने दरबार में बुलाया है।

तीनों में बहस शुरू हो गई कि सबसे बेहतर मैं हूं। अब मंत्री ने निर्णय लिया कि वह तीनों को ही राजा के पास लेकर जाएगा और महाराज ही इस बात का फैसला करेंगे।
तीनों चित्रकार राजा के समक्ष प्रस्तुत हुए और राजा को पूरी बात बताई गई। राजा ने कहा कि जो चित्रकार उसका सबसे अच्छा चित्र बनाएगा वही सर्वश्रेष्ठ चित्रकार घोषित किया जाएगा ।

New Moral Story In Hindi 2020

तीनों चित्रकारों को अगले दिन महल में आने का न्योता दिया गया। महाराज ने स्थान ग्रहण किया। प्रतियोगिता शुरू हुई और तीनों चित्रकार राजा की तस्वीर बनाने में जुट गए।

2 घंटे बीतने के पश्चात तीनों चित्रकार राजा के सम्मुख अपनी अपनी तस्वीरें लेकर प्रस्तुत हुए। राजा ने पहली तस्वीर देखी उसमें चित्रकार ने राजा को सिंहासन पर बैठे हुए दिखाया था , चित्रकार ने चित्र को अधिक सुंदर दिखाने के लिए राजा की दोनों आंखों को सुंदर दिखाया था जबकि वास्तविकता में राजा की एक आंख कानी थी ।

राजा ने चित्र की प्रशंसा की किन्तु कहा कि इस चित्र में वास्तविकता नहीं है । अब दूसरे चित्रकार की बारी थी, उसने अपना चित्र प्रस्तुत किया जिसमें राजा तलवार लिए खड़ा था। इस चित्र में राजा की एक आंख सुंदर जबकि दूसरी आंख कानी दिखाई गई थी।

राजा ने कहा कि यह चित्र वास्तविकता तो दिखाता है किन्तु यह सुंदर नहीं है।

अब तीसरे चित्रकार ने अपनी रचना राजा को दिखाई जिसे देखकर राजा स्वयं आश्चर्य में पड़ गया क्योंकि इस चित्र में राजा को धनुष बाण से निशाना साधते हुए दिखाया गया था , जिस कारण निशाना साधते समय राजा की एक आंख को बंद दिखाया गया था।

राजा को यह तस्वीर बहुत पसंद आई इसलिए राजा ने उस तीसरे चित्रकार को ही सर्वश्रेष्ठ चित्रकार घोषित किया।
तीसरे चित्रकार ने राजा की तस्वीर को वास्तविक भी दिखाया था और सुंदर भी इसी कारण वह विजयी हुए।

कहानी से शिक्षा- प्रतिभा की कमी ईश्वर ने किसी भी व्यक्ति में नहीं रखी है। हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा के आधार पर कार्य करना चाहिए जो कि उचित भी है किन्तु यदि अपने कार्य को पूर्ण विवेक से किया जाए तभी आप सर्वश्रेष्ठ बन पाते हैं जैसे कि तीसरे चित्रकार ने अपने विवेक द्वारा राजा को प्रभावित किया और सर्वश्रेष्ठ चित्रकार होने का गौरव प्राप्त किया।
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